बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतीनों भाइयोंने अनेकों प्रकारकी बड़ी ही कठिन तपस्या की, जिसका वर्णन नहीं हो सकता। [उनका उग्र] तप देखकर ब्रह्माजी उनके पास गये और बोले—हे तात! मैं प्रसन्न हूँ, वर माँगो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 178 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई।।
गयउ निकट तप देखि बिधाता। मागहु बर प्रसन्न मैं ताता।।
स्रोत अभिलेख 1.177 · पुस्तक पृ. 178, 178
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई।।
English explanation
All three brothers performed various austerities, so severe that they cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | की | performed |
| बिबिध | अनेक प्रकार की | various kinds of |
| तप | तपस्या | austerities |
| तीनिहुँ | तीनों ने | all three |
| भाई | भाइयों—रावण, कुंभकर्ण और विभीषण—ने | brothers—Ravana, Kumbhakarna, and Vibhishana |
| परम | अत्यंत | extremely |
| उग्र | कठोर | severe |
| नहिं | नहीं | not |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| सो | वह तपस्या | those austerities |
| जाई | जा सकता | can be |
2 गयउ निकट तप देखि बिधाता। मागहु बर प्रसन्न मैं ताता।।
English explanation
Seeing their austerities, Brahma approached and said, ‘Dear child, ask for a boon; I am pleased.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | गए | went |
| निकट | निकट | near |
| तप | तपस्या | austerities |
| देखि | देखकर | having seen |
| बिधाता | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| मागहु | माँगो | ask for |
| बर | वरदान | a boon |
| प्रसन्न | प्रसन्न हूँ | am pleased |
| मैं | मैं | I |
| ताता | प्रिय पुत्र | dear child |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.177
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 178
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 178, 178
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।