बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअभी क्षणभरमें यह कालका ग्रास हो जायगा। मैं पुकारकर कहे देता हूँ, फिर मुझे दोष नहीं है। यदि तुम इसे बचाना चाहते हो, तो हमारा प्रताप, बल और क्रोध बतलाकर इसे मना कर दो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 263 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।।
तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।
स्रोत अभिलेख 1.274 · पुस्तक पृ. 262, 263
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।।
English explanation
He will become death’s prey in a moment. I declare it aloud; the blame will not lie with me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | काल; मृत्यु | death |
| कवलु | ग्रास; निगला जाने वाला कौर | prey; a morsel to be swallowed |
| होइहि | हो जाएगा | will become |
| छन | क्षण | a moment |
| माहीं | के भीतर | within |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| पुकारि | पुकारकर; ऊँचे स्वर में | aloud; calling out |
| खोरि | दोष | blame |
| मोहि | मुझ पर | on me |
| नाहीं | नहीं | not |
2 तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।
English explanation
If you wish to save him, restrain him by telling him of my might, strength, and anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप, विश्वामित्र | you, Vishvamitra |
| हटकउ | रोकिए; मना कीजिए | restrain him; forbid him |
| जौं | यदि | if |
| चहहु | चाहते हैं | wish |
| उबारा | उसका बचाव | his rescue |
| कहि | बताकर | by telling |
| प्रतापु | प्रताप; प्रभावशाली पराक्रम | might; formidable prowess |
| बलु | बल | strength |
| रोषु | क्रोध | anger |
| हमारा | हमारा; यहाँ परशुराम का | my; referring here to Parashurama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.274
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 263
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 262, 263
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।