बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।
मूल पाठ
कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।
सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।।
स्रोत अभिलेख 1.355 · पुस्तक पृ. 335, 336
भावार्थ
मूल पाठ के बादसैकड़ों सरस्वती, शेष, वेद, ब्रह्मा, महादेवजी और गणेशजी भी नहीं कह सकते। फिर भला मैं उसे किस प्रकारसे बखानकर कहूँ? कहीं केंचुआ भी धरतीको सिरपर ले सकता है!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 335 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।
English explanation
—cannot be described even by a hundred Saraswatis and Sheshas, nor by the Vedas, Brahma, Shiva, or Ganesha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | वर्णन कर | describe |
| न | नहीं | not |
| सकहि | सकते हैं | can |
| सत | सौ | a hundred |
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| सेसू | नागराज शेष | Shesha, the serpent king |
| बेद | वेद | the Vedas |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| महेस | शिव | Shiva |
| गनेसू | गणेश | Ganesha |
2 सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।।
English explanation
How, then, could I describe it? Can an ordinary earthly snake bear the earth upon its head?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उसको | that |
| मै | मैं | I |
| कहौं | कहूँ | could tell |
| कवन | किस | what |
| बिधि | रीति से | in what manner |
| बरनी | वर्णन करके | by describing |
| भूमिनागु | धरती का साधारण साँप | an ordinary earthly snake |
| सिर | सिर पर | upon its head |
| धरइ | धारण कर सकता है | can bear |
| कि | क्या | can it? |
| धरनी | पृथ्वी | the earth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.355
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 335
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 335, 336
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।