बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीको देखकर और आज्ञा पाकर सब सिर नवाकर अपने-अपने घरको चले। वहाँके प्रेम, आनन्द, विनोद, महत्त्व, समय, समाज और मनोहरताको—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 335 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।
प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।।
स्रोत अभिलेख 1.355 · पुस्तक पृ. 335, 336
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।
English explanation
After seeing Rama and receiving the king’s permission, they bowed their heads and departed for their respective homes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | Rama |
| देखि | देखकर | having seen |
| रजायसु | राजा की आज्ञा | the king’s permission |
| पाई | पाकर | having received |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| भवन | घर | homes |
| चले | चले गए | departed |
| सिर | सिर | heads |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
2 प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।।
English explanation
That love, delight, merriment, splendor, occasion, gathering, and loveliness—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम | love |
| प्रमोद | हर्ष | delight |
| बिनोदु | आनंदपूर्ण विनोद | merriment |
| बढ़ाई | महिमा और वैभव | splendor and magnificence |
| समउ | अवसर | occasion |
| समाजु | सभा और जुटे हुए लोग | gathering |
| मनोहरताई | मनोहरता | loveliness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.355
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 335
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 335, 336
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।