बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि न जाई कछु हृदय गलानी। मन महुँ रामाहि सुमिर सयानी।।
मूल पाठ
कहि न जाई कछु हृदय गलानी। मन महुँ रामाहि सुमिर सयानी।।
जौ प्रभु दीनदयालु कहावा। आरती हरन बेद जसु गावा।।
स्रोत अभिलेख 1.59 · पुस्तक पृ. 79, 80
भावार्थ
मूल पाठ के बादसतीजीके हृदयकी ग्लानि कुछ कही नहीं जाती। बुद्धिमती सतीजीने मनमें श्रीरामचन्द्रजीका स्मरण किया और कहा—हे प्रभो! यदि आप दीनदयालु कहलाते हैं और वेदोंने आपका यह यश गाया है कि आप दु:खको हरनेवाले हैं,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 79 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहि न जाई कछु हृदय गलानी। मन महुँ रामाहि सुमिर सयानी।।
English explanation
The remorse in her heart could not be expressed. The discerning Sati remembered Rama inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कही | expressed |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकती | can be |
| कछु | कुछ भी | at all |
| हृदय | हृदय की | of the heart |
| गलानी | ग्लानि | remorse |
| मन | मन | mind |
| महुँ | में | in |
| रामाहि | राम को | Rama |
| सुमिर | स्मरण करके | remembering |
| सयानी | समझदार सती | the discerning Sati |
2 जौ प्रभु दीनदयालु कहावा। आरती हरन बेद जसु गावा।।
English explanation
If, Lord, you are called compassionate to the distressed, and the Vedas sing your praise as the remover of suffering—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौ | यदि | if |
| प्रभु | हे प्रभु राम | O Lord Rama |
| दीनदयालु | दीनों पर दया करने वाले | compassionate to the distressed |
| कहावा | कहलाते हैं | are called |
| आरती | पीड़ा या संकट | distress |
| हरन | हरने वाले | remover of |
| बेद | वेद | the Vedas |
| जसु | यश | praise |
| गावा | गाते हैं | sing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 79
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 79, 80
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।