बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा।।
मूल पाठ
सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा।।
अब बिधि अस बूझिअ नहि तोही। संकर बिमुख जिआवसि मोही।।
स्रोत अभिलेख 1.59 · पुस्तक पृ. 79, 80
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसका फल विधाताने मुझको दिया, जो उचित था वही किया; परन्तु हे विधाता! अब तुझे यह उचित नहीं है जो शङ्करसे विमुख होनेपर भी मुझे जिला रहा है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 79 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा।।
English explanation
The Creator has given me the consequence of that; he did just what was fitting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उसी का | of that |
| फलु | फल | consequence |
| मोहि | मुझे | to me |
| बिधाताँ | विधाता ने | the Creator |
| दीन्हा | दिया | gave |
| जो | जो | whatever |
| कछु | कुछ | anything |
| उचित | उचित | fitting |
| रहा | था | was |
| सोइ | वही | that very thing |
| कीन्हा | किया | did |
2 अब बिधि अस बूझिअ नहि तोही। संकर बिमुख जिआवसि मोही।।
English explanation
But now, O Creator, this does not seem fitting of you: you keep me alive though Shiva has turned away from me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| बिधि | हे विधाता | O Creator |
| अस | ऐसा | this |
| बूझिअ | उचित सूझता | seems fitting |
| नहि | नहीं | not |
| तोही | तुम्हें | to you |
| संकर | शिव | Shiva |
| बिमुख | विमुख होने पर | having turned away |
| जिआवसि | तुम जीवित रखते हो | you keep alive |
| मोही | मुझे | me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 79
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 79, 80
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।