बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे सखी! [भला] कहो तो ऐसा कौन शरीरधारी होगा जो इस रूपको देखकर मोहित न हो जाय (अर्थात् यह रूप जड़-चेतन सबको मोहित करनेवाला है)। [तब] कोई दूसरी सखी प्रेमसहित कोमल वाणीसे बोली—हे सयानी! मैंने जो सुना है उसे सुनो—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 218 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी।।
कोउ सप्रेम बोली मृदु बानी। जो मैं सुना सो सुनहु सयानी।।
स्रोत अभिलेख 1.221 · पुस्तक पृ. 218, 218
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी।।
English explanation
AI-draft meaning: Tell me, friend, what embodied being would not be enchanted on seeing this beauty?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताओ | tell me |
| सखी | हे सखी | O friend |
| अस | ऐसा | such |
| को | कौन | who |
| तनुधारी | शरीर धारण करने वाला जीव | embodied being |
| जो | जो | who |
| न | नहीं | not |
| मोह | मोहित हो | be enchanted |
| यह | यह | this |
| रूप | सुंदर रूप | beauty |
| निहारी | देखकर | on seeing |
2 कोउ सप्रेम बोली मृदु बानी। जो मैं सुना सो सुनहु सयानी।।
English explanation
One friend spoke affectionately in gentle words: Listen, discerning friend, to what I have heard.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोउ | कोई एक सखी | one of the friends |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | affectionately |
| बोली | बोली | spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
| जो | जो बात | what |
| मैं | मैंने | I |
| सुना | सुना है | have heard |
| सो | वह बात | that |
| सुनहु | सुनो | listen to |
| सयानी | हे समझदार सखी | O discerning friend |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.221
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 218
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 218, 218
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।