बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा।।
मूल पाठ
कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा।।
मुनि मन अगम गाधिसुत करनी। मुदित बसिष्ट बिपुल बिधि बरनी।।
स्रोत अभिलेख 1.359 · पुस्तक पृ. 338, 339
भावार्थ
मूल पाठ के बादवसिष्ठजी धर्मके इतिहास कह रहे हैं और राजा रनिवाससहित सुन रहे हैं। जो मुनियोंके मनको भी अगम्य है, ऐसी विश्वामित्रजीकी करनीको वसिष्ठजीने आनन्दित होकर बहुत प्रकारसे वर्णन किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 339 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा।।
English explanation
Vashishtha recounts narratives concerning dharma, and the king listens together with the queens.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | recounts |
| बसिष्टु | ऋषि वसिष्ठ | the sage Vashishtha |
| धरम | धर्म-संबंधी | concerning dharma |
| इतिहासा | पुराने वृत्तांत | traditional narratives |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| महीसु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सहित | के साथ | together with |
| रनिवासा | रानियाँ | the queens |
2 मुनि मन अगम गाधिसुत करनी। मुदित बसिष्ट बिपुल बिधि बरनी।।
English explanation
Vashishtha joyfully described in many ways the deeds of Vishvamitra, Gadhi’s son—deeds beyond even the minds of sages to comprehend.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| मन | मन के लिए | for the minds |
| अगम | पहुँच से परे | beyond comprehension |
| गाधिसुत | गाधि के पुत्र विश्वामित्र की | of Vishvamitra, son of Gadhi |
| करनी | करनी, कार्य | deeds |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| बसिष्ट | वसिष्ठ ने | Vashishtha |
| बिपुल | अनेक | many |
| बिधि | प्रकारों से | in ways |
| बरनी | वर्णन किया | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.359
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 339
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 338, 339
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।