बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।।
मूल पाठ
कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।।
समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।।
स्रोत अभिलेख 1.296 · पुस्तक पृ. 280, 280
भावार्थ
मूल पाठ के बादयों कहते हुए वे अनेक प्रकारके सुन्दर वस्त्र पहन-पहनकर चले। आनन्दित होकर नगाड़ेवालोंने बड़े जोरसे नगाड़ोंपर चोट लगायी। सब लोगोंने जब यह समाचार पाया, तब घर-घर बधावे होने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 280 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।।
English explanation
AI draft: They proceeded, talking and wearing varied garments; drums were joyfully beaten with resounding force.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while speaking |
| चले | चले | proceeded |
| पहिरें | पहने हुए | wearing |
| पट | वस्त्र | garments |
| नाना | तरह-तरह के | of various kinds |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| हने | बजाए | beat or sounded |
| गहगहे | जोर-जोर से गूँजते हुए | resoundingly |
| निसाना | नगाड़े | large ceremonial drums |
2 समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।।
English explanation
Everyone received the news, and celebrations began in every home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समाचार | समाचार | news |
| सब | सभी | all |
| लोगन्ह | लोगों ने | the people |
| पाए | प्राप्त किया | received |
| लागे | शुरू हुए | began |
| घर | घर | home |
| घर | घर; प्रत्येक घर में | home; in every home |
| होने | होने | to take place |
| बधाए | बधाई के उत्सव | congratulatory celebrations |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.296
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 280
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 280, 280
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।