बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।
मूल पाठ
कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।
रबि मंडल देखत लघु लागा। उदयँ तासु तिभुवन तम भागा।।
स्रोत अभिलेख 1.256 · पुस्तक पृ. 248, 249
भावार्थ
मूल पाठ के बादकहाँ घड़ेसे उत्पन्न होनेवाले [छोटे-से] मुनि अगस्त्य और कहाँ अपार समुद्र? किन्तु उन्होंने उसे सोख लिया, जिसका सुयश सारे संसारमें छाया हुआ है। सूर्यमण्डल देखनेमें छोटा लगता है, पर उसके उदय होते ही तीनों लोकोंका अन्धकार भाग जाता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 248 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।
English explanation
What a contrast between Agastya and the boundless ocean! He drained it, and his glorious fame is known throughout the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहँ | कहाँ | where; what a contrast |
| कुंभज | घड़े से जन्मे ऋषि अगस्त्य | Agastya, the jar-born sage |
| कहँ | कहाँ | where; in contrast |
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| अपारा | अपार | boundless |
| सोषेउ | सोख लिया | drained it |
| सुजसु | उत्तम यश | glorious fame |
| सकल | सारे | the whole |
| संसारा | संसार में | throughout the world |
2 रबि मंडल देखत लघु लागा। उदयँ तासु तिभुवन तम भागा।।
English explanation
The sun's disk looks small, yet when it rises, darkness flees from the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रबि | सूर्य का | of the sun |
| मंडल | गोल बिंब | disk |
| देखत | देखने में | to the eye |
| लघु | छोटा | small |
| लागा | लगता है | appears |
| उदयँ | उदय होने पर | upon rising |
| तासु | उसके | its |
| तिभुवन | तीनों लोकों का | of the three worlds |
| तम | अंधकार | darkness |
| भागा | भाग जाता है | flees |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.256
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 248
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 248, 249
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