बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करहि जाइ तपु सैलकुमारी। नारद कहा सो सत्य बिचारी।।
मूल पाठ
करहि जाइ तपु सैलकुमारी। नारद कहा सो सत्य बिचारी।।
मातु पितहि पुनि यह मत भावा। तपु सुखप्रद दुख दोष नसावा।।
स्रोत अभिलेख 1.73 · पुस्तक पृ. 90, 90
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पार्वती! नारदजीने जो कहा है, उसे सत्य समझकर तू जाकर तप कर। फिर यह बात तेरे माता-पिताको भी अच्छी लगी है। तप सुख देनेवाला और दु:ख-दोषका नाश करनेवाला है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 90 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करहि जाइ तपु सैलकुमारी। नारद कहा सो सत्य बिचारी।।
English explanation
AI-draft meaning: O daughter of the mountain, regard Narada’s words as true; go and practice austerities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहि | करो | perform |
| जाइ | जाकर | having gone |
| तपु | तपस्या | austerities |
| सैलकुमारी | हे पर्वतराज की पुत्री पार्वती | O Parvati, daughter of the mountain king |
| नारद | देवर्षि नारद ने | the divine sage Narada |
| कहा | जो कहा | what he said |
| सो | उसे | that |
| सत्य | सच्चा | true |
| बिचारी | मानकर | considering |
2 मातु पितहि पुनि यह मत भावा। तपु सुखप्रद दुख दोष नसावा।।
English explanation
Her mother and father, too, then approved this course. Austerity brings happiness and removes suffering and faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता को | to her mother |
| पितहि | पिता को | to her father |
| पुनि | फिर; भी | then; also |
| यह | यह | this |
| मत | विचार | course of thought |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
| तपु | तपस्या | austerity |
| सुखप्रद | सुख देने वाली | bringing happiness |
| दुख | दुख | suffering |
| दोष | दोष | faults |
| नसावा | मिटाने वाली | removing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 90
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 90, 90
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।