बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करहिं जोग जोगी जेहि लागी। कोहु मोहु ममता मदु त्यागी।।
मूल पाठ
करहिं जोग जोगी जेहि लागी। कोहु मोहु ममता मदु त्यागी।।
ब्यापकु ब्रह्मु अलखु अबिनासी। चिदानंदु निरगुन गुनरासी।।
स्रोत अभिलेख 1.341 · पुस्तक पृ. 324, 324
भावार्थ
मूल पाठ के बादयोगी लोग जिनके लिये क्रोध, मोह, ममता और मदको त्यागकर योगसाधन करते हैं, जो सर्वव्यापक, ब्रह्म, अव्यक्त, अविनाशी, चिदानन्द, निर्गुण और गुणोंकी राशि हैं,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 324 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करहिं जोग जोगी जेहि लागी। कोहु मोहु ममता मदु त्यागी।।
English explanation
For whose attainment yogis practice yoga, abandoning anger, delusion, possessive attachment, and pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | practice |
| जोग | योग-साधना | yoga |
| जोगी | योगी | yogis |
| जेहि | जिनकी प्राप्ति | whose attainment |
| लागी | के लिए | for |
| कोहु | क्रोध | anger |
| मोहु | मोह | delusion |
| ममता | मेरापन और आसक्ति | possessive attachment |
| मदु | अहंकार | pride |
| त्यागी | त्यागकर | abandoning |
2 ब्यापकु ब्रह्मु अलखु अबिनासी। चिदानंदु निरगुन गुनरासी।।
English explanation
You are the all-pervading Absolute, beyond sensory perception, imperishable, consciousness and bliss itself, beyond material qualities yet a treasury of virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापकु | सर्वव्यापक | all-pervading |
| ब्रह्मु | परम तत्त्व ब्रह्म | the Absolute |
| अलखु | इंद्रियों से अगोचर | beyond sensory perception |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
| चिदानंदु | चेतना और आनंदस्वरूप | consciousness and bliss itself |
| निरगुन | प्रकृति के गुणों से परे | beyond material qualities |
| गुनरासी | सद्गुणों की राशि | a treasury of virtues |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.341
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 324
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 324, 324
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।