बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोरि पंकरुह पानि सुहाए। बोले बचन प्रेम जनु जाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर सुन्दर कमलके समान हाथोंको जोड़कर ऐसे वचन बोले जो मानो प्रेमसे ही जन्मे हों। हे रामजी! मैं किस प्रकार आपकी प्रशंसा करूँ! आप मुनियों और महादेवजीके मनरूपी मानसरोवरके हंस हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 324 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जोरि पंकरुह पानि सुहाए। बोले बचन प्रेम जनु जाए।।
राम करौ केहि भाँति प्रसंसा। मुनि महेस मन मानस हंसा।।
स्रोत अभिलेख 1.341 · पुस्तक पृ. 324, 324
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जोरि पंकरुह पानि सुहाए। बोले बचन प्रेम जनु जाए।।
English explanation
Joining his beautiful lotus-like hands, Janaka spoke words that seemed born of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोरि | जोड़कर | joining |
| पंकरुह | कमल-सदृश | lotus-like |
| पानि | हाथ | hands |
| सुहाए | सुंदर | beautiful |
| बोले | बोले | spoke |
| बचन | वचन | words |
| प्रेम | प्रेम से | of love |
| जनु | मानो | as though |
| जाए | जन्मे हों | born |
2 राम करौ केहि भाँति प्रसंसा। मुनि महेस मन मानस हंसा।।
English explanation
O Rama, how can I praise you? You are the swan in the lake of the minds of sages and Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| करौ | मैं करूँ | may I offer |
| केहि | किस | what |
| भाँति | प्रकार से | in what manner |
| प्रसंसा | प्रशंसा | praise |
| मुनि | मुनियों के | of the sages |
| महेस | शिव के | of Shiva |
| मन | मनरूपी | formed by their minds |
| मानस | मानसरोवर में | in the lake |
| हंसा | हंस | swan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.341
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 324
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 324, 324
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।