बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा। आसिरबादु सबहि सन पावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजनकजीने मुनिमण्डलीको सिर नवाया और सभीसे आशीर्वाद पाया। फिर आदरके साथ वे रूप, शील और गुणोंके निधान सब भाइयोंसे—अपने दामादोंसे मिले;॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 324 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा। आसिरबादु सबहि सन पावा।।
सादर पुनि भेंटे जामाता। रूप सील गुन निधि सब भ्राता।।
स्रोत अभिलेख 1.341 · पुस्तक पृ. 324, 324
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा। आसिरबादु सबहि सन पावा।।
English explanation
Janaka bowed his head before the assembly of sages and received blessings from them all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों की | of the sages |
| मंडलिहि | मंडली को | to the assembly |
| जनक | राजा जनक ने | King Janaka |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| आसिरबादु | आशीर्वाद | blessings |
| सबहि | सभी | all of them |
| सन | से | from |
| पावा | प्राप्त किया | received |
2 सादर पुनि भेंटे जामाता। रूप सील गुन निधि सब भ्राता।।
English explanation
Then Janaka respectfully met his sons-in-law; all the brothers were treasures of beauty, good character, and virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| पुनि | फिर | then |
| भेंटे | मिले | met |
| जामाता | दामादों से | his sons-in-law |
| रूप | सुंदरता | beauty |
| सील | सदाचार | good character |
| गुन | गुणों | virtues |
| निधि | के भंडार | treasures of |
| सब | सभी | all |
| भ्राता | भाई | brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.341
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 324
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 324, 324
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।