बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।
मूल पाठ
करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।
पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।
स्रोत अभिलेख 1.144 · पुस्तक पृ. 151, 152
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे साग, फल और कन्दका आहार करते थे और सच्चिदानन्द ब्रह्मका स्मरण करते थे। फिर वे श्रीहरिके लिये तप करने लगे और मूल-फलको त्यागकर केवल जलके आधारपर रहने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 151 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।
English explanation
They eat greens, fruits, and tubers, and remember Brahman, whose nature is existence, consciousness, and bliss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | they do |
| अहार | भोजन | eating; food |
| साक | साग | edible greens |
| फल | फल | fruits |
| कंदा | कंद | tubers |
| सुमिरहिं | स्मरण करते हैं | they remember |
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| सच्चिदानंदा | सत्, चित् और आनंदस्वरूप | of the nature of existence, consciousness, and bliss |
2 पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।
English explanation
Then they began austerities to attain Hari, giving up roots and fruits and subsisting on water alone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| हरि | भगवान हरि की प्राप्ति | attaining Hari, the Lord |
| हेतु | के लिए | for |
| करन | करने | to perform |
| तप | तपस्या | austerities |
| लागे | लगे | began |
| बारि | जल | water |
| अधार | जीवन-निर्वाह का आधार | means of subsistence |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruits |
| त्यागे | त्याग दिए | gave up |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.144
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 151
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 151, 152
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।