बालकाण्ड · दोहा 143 · दोहा/सोरठा
द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।
द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।
बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग।।143।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.143 · पुस्तक पृ. 151, 151
भावार्थ और शब्दार्थ
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1द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।
फिर वे प्रेम सहित बारह अक्षरों वाले मंत्र का जप करते थे।
English explanation
They also lovingly repeated the twelve-syllable mantra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्वादस | बारह | twelve |
| अच्छर | अक्षरों वाला | syllabled |
| मंत्र | मंत्र | sacred formula |
| पुनि | फिर; और भी | then; also |
| जपहिं | जप करते हैं | repeat in prayer |
| सहित | सहित; साथ | with |
| अनुराग | प्रेम; स्नेहपूर्ण भक्ति | love; affectionate devotion |
2 बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग।।143।।
दंपति का मन भगवान वासुदेव के चरणकमलों में अत्यंत लग गया था।
English explanation
The couple’s hearts became deeply attached to the lotus feet of Lord Vasudeva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बासुदेव | भगवान वासुदेव के | of Lord Vasudeva |
| पद | चरण | feet |
| पंकरुह | कमल | lotuses |
| दंपति | पति-पत्नी का | of the married couple |
| मन | मन; चित्त | mind; heart |
| अति | अत्यंत | deeply; exceedingly |
| लाग | लग गया; अनुरक्त हुआ | became attached |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 143
- स्रोत अभिलेख
- 1.143
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 151, 151
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