बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे कपटसे ब्राह्मणोंका सुन्दर वेष बनाये बहुत ही सुख पाते हुए सब लीला देख रहे थे। जनकजीने उनको देवताओंके समान जानकर उनका पूजन किया और बिना पहचाने भी उन्हें सुन्दर आसन दिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 302 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।।
पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें।।
स्रोत अभिलेख 1.321 · पुस्तक पृ. 302, 302
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।।
English explanation
Disguised in fine brahmin attire, they watch the wedding festivities and experience great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपट | छद्म; पहचान छिपाने वाला | disguised; concealing identity |
| बिप्र | ब्राह्मणों का | of brahmins |
| बर | सुंदर; उत्तम | fine; excellent |
| बेष | वेश | attire; guise |
| बनाएँ | बनाकर; धारण करके | having assumed |
| कौतुक | विवाह का आनंदपूर्ण दृश्य | the wedding festivities |
| देखहिं | देखते हैं | watch |
| अति | अत्यंत | great; exceedingly |
| सचु | सुख | joy |
| पाएँ | पाते हैं; पाकर | experience; receiving |
2 पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें।।
English explanation
Janaka honored them as he would gods and gave them excellent seats without recognizing their true identities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजे | पूजा; आदर किया | worshipfully honored |
| जनक | राजा जनक ने | King Janaka |
| देव | देवताओं के | gods |
| सम | समान | like |
| जानें | मानकर | regarding as |
| दिए | दिए | gave |
| सुआसन | उत्तम आसन | excellent seats |
| बिनु | बिना | without |
| पहिचानें | पहचाने | recognizing them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.321
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 302
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 302, 302
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।