बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।।
मूल पाठ
कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।।
नामकरन कर अवसरु जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 1.197 · पुस्तक पृ. 196, 197
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार कुछ दिन बीत गये। दिन और रात जाते हुए जान नहीं पड़ते। तब नामकरण- संस्कारका समय जानकर राजाने ज्ञानी मुनि श्रीवसिष्ठजीको बुला भेजा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 196 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।।
English explanation
Some days passed in this manner, without anyone noticing the passage of day and night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछुक | कुछ | some |
| दिवस | दिन | days |
| बीते | बीत गए | passed |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | manner |
| जात | बीतते हुए | passing |
| न | नहीं | not |
| जानिअ | पता चलता था | was noticed |
| दिन | दिन | day |
| अरु | और | and |
| राती | रात | night |
2 नामकरन कर अवसरु जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी।।
English explanation
Recognizing that it was time for the naming ceremony, King Dasharatha sent for the wise sage Vasishtha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नामकरन | नाम रखने का संस्कार | naming ceremony |
| कर | का | of |
| अवसरु | अवसर | occasion |
| जानी | जानकर | recognizing |
| भूप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| बोलि | बुलाने के लिए | to summon |
| पठए | संदेश भेजा | sent word |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ | the sage Vasishtha |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.197
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 196
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 196, 197
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।