बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसे [महान्] प्रभु भी सेवकके वशमें हैं और भक्तोंके लिये [दिव्य] लीलाविग्रह धारण करते हैं। यदि वेदोंमें यह वचन सत्य कहा है तो हमारी अभिलाषा भी अवश्य पूरी होगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 152 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।
जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।
स्रोत अभिलेख 1.144 · पुस्तक पृ. 151, 152
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।
English explanation
Even such a Lord is responsive to his servant and assumes a bodily form for divine play for the devotee's sake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसेउ | ऐसे भी | even such |
| प्रभु | भगवान | the Lord |
| सेवक | अपने भक्त-सेवक के | of his devoted servant |
| बस | वश में | under the sway |
| अहई | हैं | is |
| भगत | भक्त | the devotee |
| हेतु | के लिए | for the sake of |
| लीलातनु | लीला के लिए शरीर | a body for divine play |
| गहई | धारण करते हैं | assumes |
2 जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।
English explanation
If this statement expressed by the Vedas is true, then may our longing be fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| यह | यह | this |
| बचन | कथन | statement |
| सत्य | सच | true |
| श्रुति | वेदों ने | the Vedas |
| भाषा | कहा है | have expressed |
| तौ | तो | then |
| हमार | हमारी | our |
| पूजहि | पूरी हो | may be fulfilled |
| अभिलाषा | इच्छा | longing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.144
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 152
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 151, 152
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।