बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी। अकथनीय दारुन दुखु भारी।।
मूल पाठ
एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी। अकथनीय दारुन दुखु भारी।।
बीतें संबत सहस सतासी। तजी समाधि संभु अबिनासी।।
स्रोत अभिलेख 1.6 · पुस्तक पृ. 80, 80
भावार्थ
मूल पाठ के बाददक्षसुता सतीजी इस प्रकार बहुत दु:खित थीं, उनको इतना दारुण दु:ख था कि जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। सत्तासी हजार वर्ष बीत जानेपर अविनाशी शिवजीने समाधि खोली॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 80 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी। अकथनीय दारुन दुखु भारी।।
English explanation
AI-generated draft meaning: Thus Sati, Daksha’s daughter, was distressed; her suffering was indescribable, terrible, and immense.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| दुखित | दुखी | distressed |
| प्रजेसकुमारी | प्रजापति दक्ष की पुत्री सती | Sati, daughter of Prajapati Daksha |
| अकथनीय | जिसका वर्णन न हो सके | indescribable |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दुखु | दुःख | suffering |
| भारी | अत्यंत अधिक | immense |
2 बीतें संबत सहस सतासी। तजी समाधि संभु अबिनासी।।
English explanation
After eighty-seven thousand years had passed, the imperishable Shiva emerged from meditative absorption.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीतें | बीत जाने पर | after having elapsed |
| संबत | वर्ष | years |
| सहस | हजार | thousand |
| सतासी | सत्तासी | eighty-seven |
| तजी | छोड़ी | left |
| समाधि | ध्यान की लीन अवस्था | meditative absorption |
| संभु | शिव | Shiva |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 80
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 80, 80
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।