बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशिवजी रामनामका स्मरण करने लगे, तब सतीजीने जाना कि अब जगत्के स्वामी (शिवजी) जागे। उन्होंने जाकर शिवजीके चरणोंमें प्रणाम किया। शिवजीने उनको बैठनेके लिये सामने आसन दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 80 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे।।
जाइ संभु पद बंदनु कीन्ही। सनमुख संकर आसनु दीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.6 · पुस्तक पृ. 80, 80
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे।।
English explanation
Shiva began remembering Rama’s name. Sati realized that Shiva, the lord of the world, had awakened from meditation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| नाम | नाम | name |
| सिव | शिव | Shiva |
| सुमिरन | स्मरण करने | remembering |
| लागे | लगे | began |
| जानेउ | जान लिया | realized |
| सतीं | सती ने | Sati |
| जगतपति | जगत के स्वामी शिव | Shiva, lord of the world |
| जागे | जाग गए | had awakened |
2 जाइ संभु पद बंदनु कीन्ही। सनमुख संकर आसनु दीन्हा।।
English explanation
Sati went and bowed at Shiva’s feet. Shankara gave her a seat before him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone |
| संभु | शिव के | Shiva’s |
| पद | चरणों की | feet |
| बंदनु | वंदना | reverent salutation |
| कीन्ही | की | performed |
| सनमुख | अपने सामने | before him |
| संकर | शंकर ने | Shiva |
| आसनु | बैठने का स्थान | a seat |
| दीन्हा | दिया | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 80
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 80, 80
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।