बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकार बहुत समय बीत गया। श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें नित नयी प्रीति हो रही है। शिवजीके [कठोर] नियम, [अनन्य] प्रेम और उनके हृदयमें भक्तिकी अटल टेकको [जब श्रीरामचन्द्रजीने] देखा,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 92 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती।।
नैमु प्रेमु संकर कर देखा। अबिचल हृदयँ भगति कै रेखा।।
स्रोत अभिलेख 1.76 · पुस्तक पृ. 92, 93
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती।।
English explanation
Much time passed in this way, while love for Rama’s feet was renewed each day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| गयउ | गया | went; passed |
| कालु | समय | time |
| बहु | बहुत | much |
| बीती | बीतकर | having elapsed |
| नित | नित्य; प्रतिदिन | daily |
| नै | नई | new; fresh |
| होइ | होती है | becomes |
| राम | राम के | Rama’s |
| पद | चरणों में | for the feet |
| प्रीती | प्रेम | love |
2 नैमु प्रेमु संकर कर देखा। अबिचल हृदयँ भगति कै रेखा।।
English explanation
Rama saw Shankara’s steadfast observance and love, and the unwavering mark of devotion in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नैमु | नियम; व्रत का पालन | steadfast observance; discipline |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| संकर | शंकर; भगवान शिव | Shankara, Lord Shiva |
| कर | का | of; possessive marker |
| देखा | देखा | saw |
| अबिचल | अचल; अडिग | unwavering |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| भगति | भक्ति | devotion |
| कै | की | of; possessive marker |
| रेखा | रेखा; अंकित छाप | line; inscribed mark |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 92
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 92, 93
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