बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रगटै रामु कृतग्य कृपाला। रूप सील निधि तेज बिसाला।।
मूल पाठ
प्रगटै रामु कृतग्य कृपाला। रूप सील निधि तेज बिसाला।।
बहु प्रकार संकरहि सराहा। तुम्ह बिनु अस ब्रतु को निरबाहा।।
स्रोत अभिलेख 1.76 · पुस्तक पृ. 92, 93
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब कृतज्ञ (उपकार माननेवाले), कृपालु, रूप और शीलके भण्डार, महान् तेजपुञ्ज भगवान् श्रीरामचन्द्रजी प्रकट हुए। उन्होंने बहुत तरहसे शिवजीकी सराहना की और कहा कि आपके बिना ऐसा (कठिन) व्रत कौन निबाह सकता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 92 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रगटै रामु कृतग्य कृपाला। रूप सील निधि तेज बिसाला।।
English explanation
The grateful and compassionate Rama appeared, a treasury of beauty and noble character, possessing immense splendor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रगटै | प्रकट हुए | appeared |
| रामु | भगवान राम | Lord Rama |
| कृतग्य | कृतज्ञ; उपकार मानने वाले | grateful; appreciative |
| कृपाला | कृपालु | compassionate |
| रूप | सौंदर्य | beauty |
| सील | शील; उत्तम स्वभाव | noble character |
| निधि | भंडार | treasury |
| तेज | तेज; प्रभा | splendor; radiance |
| बिसाला | विशाल; महान | immense; great |
2 बहु प्रकार संकरहि सराहा। तुम्ह बिनु अस ब्रतु को निरबाहा।।
English explanation
Rama praised Shankara in many ways: ‘Who besides you could have maintained such a vow?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार से | in ways |
| संकरहि | शंकर को | Shankara, as the object |
| सराहा | सराहा; प्रशंसा की | praised |
| तुम्ह | आप | you |
| बिनु | के बिना; के सिवा | without; besides |
| अस | ऐसा | such |
| ब्रतु | व्रत; संकल्प | vow; resolve |
| को | कौन | who |
| निरबाहा | निभा सकता था | could have maintained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 92
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 92, 93
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