बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दएक बार इन्होंने शिवजीके साथ आते हुए [राहमें] रघुकुलरूपी कमलके सूर्य श्रीरामचन्द्रजीको देखा, तब इन्हें मोह हो गया और इन्होंने शिवजीका कहना न मानकर भ्रमवश सीताजीका वेष धारण कर लिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 112 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।।
भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.98 · पुस्तक पृ. 112, 112
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।।
English explanation
AI draft: Once, while returning with Shiva, Sati saw Rama, the sun to the lotus of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | बार; अवसर पर | occasion |
| आवत | आते हुए; लौटते हुए | while coming back |
| सिव | शिव के | Shiva |
| संगा | साथ | with |
| देखेउ | देखा | saw |
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu’s lineage |
| कमल | कमलरूपी | likened to a lotus |
| पतंगा | सूर्य; यहाँ राम | the sun; here, Rama |
2 भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा।।
English explanation
AI draft: Sati became deluded and did not heed Shiva’s words; under the sway of confusion, she assumed Sita’s guise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हुआ | arose |
| मोहु | मोह; विवेक को ढकने वाला भ्रम | delusion |
| सिव | शिव का | Shiva’s |
| कहा | कहा हुआ; निर्देश | what was said; instruction |
| न | नहीं | not |
| कीन्हा | किया; माना | followed; heeded |
| भ्रम | भ्रम के | of confusion |
| बस | वश में | under the sway |
| बेषु | वेश; रूप | guise |
| सीय | सीता का | Sita’s |
| कर | कर; बनाकर | making; assuming |
| लीन्हा | ले लिया; धारण कर लिया | took on; assumed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 112
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 112, 112
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।