बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा।।
मूल पाठ
उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा।।
सुमन समेत बाम कर दोना। सावँर कुअँर सखी सुठि लोना।।
स्रोत अभिलेख 1.233 · पुस्तक पृ. 228, 228
भावार्थ
मूल पाठ के बादवक्ष:स्थलपर मणियोंकी माला है। शङ्खके सदृश सुन्दर गला है। कामदेवके हाथीके बच्चेकी सूँड़के समान (उतार-चढ़ाववाली एवं कोमल) भुजाएँ हैं, जो बलकी सीमा हैं। जिसके बायें हाथमें फूलोंसहित दोना है, हे सखि! वह साँवला कुँअर तो बहुत ही सलोना है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 228 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा।।
English explanation
Gem necklaces adorn their chests, and their graceful necks resemble conches; their arms resemble the trunk of the god of love’s young elephant and are the pinnacle of strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | वक्ष पर | on the chest |
| मनि | मणियों की | of gems |
| माल | मालाएँ | necklaces |
| कंबु | शंख जैसी | conch-like |
| कल | सुंदर | graceful |
| गीवा | गर्दन | neck |
| काम | कामदेव के | of the god of love |
| कलभ | हाथी के बच्चे की | of a young elephant |
| कर | सूँड़ जैसी | like a trunk |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| बलसींवा | बल की सीमा; पराकाष्ठा | the pinnacle of strength |
2 सुमन समेत बाम कर दोना। सावँर कुअँर सखी सुठि लोना।।
English explanation
In his left hand is a leaf bowl containing flowers. Friend, the dark-complexioned prince is exceedingly handsome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमन | फूलों | flowers |
| समेत | सहित | containing; together with |
| बाम | बाएँ | left |
| कर | हाथ में | in the hand |
| दोना | पत्तों का कटोरा | leaf bowl |
| सावँर | साँवले | dark-complexioned |
| कुअँर | राजकुमार राम | Prince Rama |
| सखी | हे सखी | O friend |
| सुठि | अत्यंत | exceedingly |
| लोना | सुंदर; सलोने | handsome; charming |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.233
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 228
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 228, 228
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।