बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला।।
मूल पाठ
चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला।।
मुखछबि कहि न जाइ मोहि पाहीं। जो बिलोकि बहु काम लजाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.233 · पुस्तक पृ. 228, 228
भावार्थ
मूल पाठ के बादठोड़ी, नाक और गाल बड़े सुन्दर हैं, और हँसीकी शोभा मनको मोल लिये लेती है। मुखकी छबि तो मुझसे कही ही नहीं जाती, जिसे देखकर बहुत-से कामदेव लजा जाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 228 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला।।
English explanation
Their chins, noses, and cheeks are beautiful; the charm of their smiles seems to buy the heart outright.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारु | सुंदर | beautiful |
| चिबुक | ठोड़ी | chin |
| नासिका | नाक | nose |
| कपोला | गाल | cheeks |
| हास | हँसी; मुस्कान | smile |
| बिलास | मनोहर छटा | charming play |
| लेत | ले लेते हैं | take; acquire |
| मनु | मन | the heart |
| मोला | मोल; खरीदकर | by purchase |
2 मुखछबि कहि न जाइ मोहि पाहीं। जो बिलोकि बहु काम लजाहीं।।
English explanation
I cannot describe the beauty of their faces; seeing it, even many gods of love would feel abashed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुखछबि | मुख की सुंदरता | beauty of the face |
| कहि | कही | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकती | can be |
| मोहि | मुझ | me |
| पाहीं | से | by |
| जो | जिसे | which |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| बहु | अनेक | many |
| काम | कामदेव | gods of love |
| लजाहीं | लजा जाते हैं | feel abashed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.233
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 228
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 228, 228
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।