बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।।
मूल पाठ
उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।।
एहि बिधि रहा जाहि जस भाऊ। तेहिं तस देखेउ कोसलराऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.242 · पुस्तक पृ. 235, 236
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस (स्नेह और सुख) का वे हृदयमें अनुभव कर रही हैं, पर वे भी उसे कह नहीं सकतीं। फिर कोई कवि उसे किस प्रकार कह सकता है। इस प्रकार जिसका जैसा भाव था, उसने कोसलाधीश श्रीरामचन्द्रजीको वैसा ही देखा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 236 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।।
English explanation
Even Sita herself experiences it in her heart but cannot express it; how, then, could any poet describe it?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | हृदय में | in the heart |
| अनुभवति | अनुभव करती हैं | experiences |
| न | नहीं | not |
| कहि | कह | express |
| सक | सकतीं | can |
| सोऊ | वे स्वयं भी | even she herself |
| कवन | किस | what |
| प्रकार | प्रकार से | in what manner |
| कहै | कह सके | could describe |
| कबि | कवि | poet |
| कोऊ | कोई | any |
2 एहि बिधि रहा जाहि जस भाऊ। तेहिं तस देखेउ कोसलराऊ।।
English explanation
Thus, each person saw Rama, lord of Kosala, according to the feeling they held.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| रहा | था | was |
| जाहि | जिसके मन में | in whom |
| जस | जैसा | whatever kind of |
| भाऊ | भाव | feeling |
| तेहिं | उसने | that person |
| तस | वैसा | accordingly |
| देखेउ | देखा | saw |
| कोसलराऊ | कोसल के स्वामी राम | Rama, lord of Kosala |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.242
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 236
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 235, 236
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।