बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।।
मूल पाठ
हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।।
रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया।।
स्रोत अभिलेख 1.242 · पुस्तक पृ. 235, 236
भावार्थ
मूल पाठ के बादहरिभक्तोंने दोनों भाइयोंको सब सुखोंके देनेवाले इष्टदेवके समान देखा। सीताजी जिस भावसे श्रीरामचन्द्रजीको देख रही हैं, वह स्नेह और सुख तो कहनेमें ही नहीं आता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 236 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।।
English explanation
The devotees of Hari saw the two brothers as their chosen deity, the giver of every happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिभगतन्ह | हरि के भक्तों ने | the devotees of Hari |
| देखे | देखा | saw |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई राम और लक्ष्मण | brothers Rama and Lakshmana |
| इष्टदेव | अपने आराध्य देव | their chosen deity |
| इव | के समान | like |
| सब | सभी | all |
| सुख | सुख | happiness |
| दाता | देने वाले | giver |
2 रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया।।
English explanation
The feeling with which Sita gazes at Rama, and the love and joy in it, cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | at Rama |
| चितव | देखती हैं | gazes |
| भायँ | भाव से | with feeling |
| जेहि | जिस | which |
| सीया | सीता | Sita |
| सो | वह | that |
| सनेहु | प्रेम | love |
| सुखु | सुख | joy |
| नहिं | नहीं | not |
| कथनीया | कहने योग्य | expressible in words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.242
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 236
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 235, 236
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