बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[वह सोचने लगी कि] यहाँ और वहाँ मैंने दो बालक देखे। यह मेरी बुद्धिका भ्रम है या और कोई विशेष कारण है? प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने माताको घबड़ायी हुई देखकर मधुर मुसकानसे हँस दिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 201 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।।
देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।
स्रोत अभिलेख 1.201 · पुस्तक पृ. 200, 201
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।।
English explanation
She saw two children, one here and one there, and wondered: Is this a delusion of my mind, or some other extraordinary occurrence?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | यहाँ | here |
| उहाँ | वहाँ | there |
| दुइ | दो | two |
| बालक | बालक | children |
| देखा | देखे | saw |
| मतिभ्रम | बुद्धि का भ्रम | delusion of the mind |
| मोर | मेरा | my |
| कि | या | or |
| आन | अन्य; कोई और | other; something else |
| बिसेषा | विशेष; अद्भुत बात | extraordinary occurrence |
2 देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।
English explanation
Rama saw his mother distressed; the Lord smiled sweetly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | राम; माता के बालक और प्रभु | Rama, her child and the Lord |
| जननी | माता को | his mother |
| अकुलानी | व्याकुल; घबराई हुई | distressed; agitated |
| प्रभु | प्रभु; राम | the Lord, Rama |
| हँसि | हँसकर; मुसकराकर | smiling |
| दीन्ह | दी | gave |
| मधुर | मधुर; मनोहर | sweet; gentle |
| मुसुकानी | मुसकान | a smile |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.201
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 201
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 200, 201
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।