बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।
मूल पाठ
गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।
बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।।
स्रोत अभिलेख 1.201 · पुस्तक पृ. 200, 201
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाता भयभीत होकर (पालनेमें सोया था, यहाँ किसने लाकर बैठा दिया, इस बातसे डरकर) पुत्रके पास गयी, तो वहाँ बालकको सोया हुआ देखा। फिर [पूजास्थानमें लौटकर] देखा कि वही पुत्र वहाँ [भोजन कर रहा] है। उनके हृदयमें कम्प होने लगा और मनको धीरज नहीं होता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 200 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।
English explanation
Frightened, the mother went to the infant and saw the child asleep there again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गै | गईं | went |
| जननी | माता | the mother |
| सिसु | शिशु; बाल राम | the infant Rama |
| पहिं | के पास | to; near |
| भयभीता | डरी हुई | frightened |
| देखा | देखा | saw |
| बाल | बालक | the child |
| तहाँ | वहाँ; पालने में | there, in the cradle |
| पुनि | फिर | again |
| सूता | सोया हुआ | asleep |
2 बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।।
English explanation
Returning again, she saw that same son. Her heart trembled, and her mind could find no composure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | again |
| आइ | आकर; लौटकर | having come back |
| देखा | देखा | saw |
| सुत | पुत्र | her son |
| सोई | वही | that same one |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| कंप | कँपकँपी; कंपन | trembling |
| मन | मन में | in her mind |
| धीर | धीरज; स्थिरता | composure; steadiness |
| न | नहीं | not |
| होई | होता; मिलता | arises; is attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.201
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 200
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 200, 201
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