बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।
मूल पाठ
आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।
बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.269 · पुस्तक पृ. 258, 259
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरशुरामजीने सीताजीको आशीर्वाद दिया। सखियाँ हॢषत हुईं और [वहाँ अब अधिक देर ठहरना ठीक न समझकर] वे सयानी सखियाँ उनको अपनी मण्डलीमें ले गयीं। फिर विश्वामित्रजी आकर मिले और उन्होंने दोनों भाइयोंको उनके चरणकमलोंपर गिराया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 259 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।
English explanation
Parashurama gave his blessing; Sita’s companions rejoiced, and the sensible women took her back into their own company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| दीन्हि | दिया | gave |
| सखीं | सीता की सखियाँ | Sita’s companions |
| हरषानीं | प्रसन्न हुईं | rejoiced |
| निज | अपने | their own |
| समाज | समूह में | into the company |
| लै | लेकर | taking her |
| गई | चली गईं | went away |
| सयानीं | समझदार सखियाँ | the sensible companions |
2 बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई।।
English explanation
Then Vishvamitra came and met Parashurama, and brought both brothers to bow at his lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिस्वामित्रु | ऋषि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| मिले | मिले | met him |
| पुनि | फिर | then |
| आई | आकर | having come |
| पद | चरण | feet |
| सरोज | कमल | lotuses |
| मेले | प्रणाम के लिए मिलवाए | brought to bow there |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.269
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 259
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 258, 259
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।