बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।
मूल पाठ
जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।
जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा।।
स्रोत अभिलेख 1.269 · पुस्तक पृ. 258, 259
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरशुरामजी हित समझकर भी सहज ही जिसकी ओर देख लेते हैं, वह समझता है मानो मेरी आयु पूरी हो गयी। फिर जनकजीने आकर सिर नवाया और सीताजीको बुलाकर प्रणाम कराया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 259 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।
English explanation
Even anyone whom Parashurama regarded kindly as a well-wisher felt as though his life had reached its end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिसकी ओर | at whom |
| सुभायँ | शुभ भाव से; सहज सद्भाव से | with kindly intent |
| चितवहिं | देखते हैं | looks |
| हितु | हितैषी | a well-wisher |
| जानी | जानकर | considering to be |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| जानइ | समझता है | thinks |
| जनु | मानो | as though |
| आइ | आकर; अब | having come to this point |
| खुटानी | आयु समाप्त हो गई | life had run out |
2 जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा।।
English explanation
Janaka came forward again and bowed his head, then summoned Sita and had her offer obeisance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | सीता के पिता राजा जनक | King Janaka, Sita’s father |
| बहोरि | फिर | again |
| आइ | आकर | having approached |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| सीय | सीता को | Sita |
| बोलाइ | बुलाकर | having summoned |
| प्रनामु | प्रणाम | obeisance |
| करावा | करवाया | had her offer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.269
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 259
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 258, 259
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।