बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजा जनकजीने सभीको उचित आसन दिये और सब परसनेवालोंको बुला लिया। आदरके साथ पत्तलें पडऩे लगीं, जो मणियोंके पत्तोंसे सोनेकी कील लगाकर बनायी गयी थीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 314 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।।
सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे।।
स्रोत अभिलेख 1.328 · पुस्तक पृ. 313, 314
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।।
English explanation
King Janaka gave everyone suitable seats and summoned all the cooks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसन | बैठने के स्थान | seats |
| उचित | उपयुक्त | suitable |
| सबहि | सभी को | to everyone |
| नृप | राजा जनक ने | King Janaka |
| दीन्हे | दिए | gave |
| बोलि | बुलाकर | calling |
| सूपकारी | रसोइयों को | the cooks |
| सब | सभी | all |
| लीन्हे | बुला लिया | summoned |
2 सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे।।
English explanation
Leaf plates began to be respectfully placed before the guests; they were fashioned with gold pins and jewel-like leaves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| लगे | लगीं | began |
| परन | सामने रखी जाने | to be placed before them |
| पनवारे | पत्तलें | leaf plates |
| कनक | सोने की | gold |
| कील | कीलें या जोड़ने की पिनें | fastening pins |
| मनि | मणिमय | jewel-like |
| पान | पत्ते | leaves |
| सँवारे | सजाए और बनाए गए | fashioned and adorned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.328
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 314
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 313, 314
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।