बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू।।
मूल पाठ
आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू।।
बीच बीच बर बास बनाए। सुरपुर सरिस संपदा छाए।।
स्रोत अभिलेख 1.304 · पुस्तक पृ. 286, 287
भावार्थ
मूल पाठ के बादसूर्यवंशके पताकास्वरूप दशरथजीको आते हुए जानकर जनकजीने नदियोंपर पुल बँधवा दिये। बीच- बीचमें ठहरनेके लिये सुन्दर घर (पड़ाव) बनवा दिये, जिनमें देवलोकके समान सम्पदा छायी है,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 287 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू।।
English explanation
Learning that Dasharatha, the standard-bearer of the solar dynasty, was approaching, Janaka had bridges built across the rivers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | approaching |
| जानि | जानकर | having learned |
| भानुकुल | सूर्य का वंश | the solar dynasty |
| केतू | ध्वज, गौरवस्वरूप प्रमुख | banner; illustrious standard-bearer |
| सरितन्हि | नदियों पर | across the rivers |
| जनक | जनक, सीता के पिता | Janaka, Sita’s father |
| बँधाए | बनवाए | had built |
| सेतू | पुल | bridges |
2 बीच बीच बर बास बनाए। सुरपुर सरिस संपदा छाए।।
English explanation
At intervals along the route, he had excellent lodgings prepared and filled them with riches like those of the gods’ city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीच | बीच में | along the way |
| बीच | अलग-अलग स्थानों पर | at intervals |
| बर | उत्तम | excellent |
| बास | ठहरने के स्थान, पड़ाव | lodgings; stopping places |
| बनाए | बनवाए, तैयार किए | built; prepared |
| सुरपुर | देवताओं की नगरी | the city of the gods |
| सरिस | जैसी | like; comparable to |
| संपदा | संपत्ति और समृद्ध सुविधाएँ | riches and abundant amenities |
| छाए | भर दिए, आच्छादित किए | filled; covered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.304
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 287
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 286, 287
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।