बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
असन सयन बर बसन सुहाए। पावहिं सब निज निज मन भाए।।
मूल पाठ
असन सयन बर बसन सुहाए। पावहिं सब निज निज मन भाए।।
नित नूतन सुख लखि अनुकूले। सकल बरातिन्ह मंदिर भूले।।
स्रोत अभिलेख 1.304 · पुस्तक पृ. 286, 287
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर जहाँ बारातके सब लोग अपने-अपने मनकी पसंदके अनुसार सुहावने उत्तम भोजन, बिस्तर और वस्त्र पाते हैं। मनके अनुकूल नित्य नये सुखोंको देखकर सभी बरातियोंको अपने घर भूल गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 287 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 असन सयन बर बसन सुहाए। पावहिं सब निज निज मन भाए।।
English explanation
Everyone receives food, sleeping arrangements, and fine, pleasing garments according to their own preferences.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असन | भोजन | food |
| सयन | शयन, सोने की व्यवस्था | beds; sleeping arrangements |
| बर | उत्तम | fine; excellent |
| बसन | वस्त्र | garments |
| सुहाए | सुंदर, मनभावन | beautiful; pleasing |
| पावहिं | पाते हैं | receive |
| सब | सभी लोग | everyone |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | each one’s own |
| मन | मन को | to the heart; to one’s taste |
| भाए | पसंद आने वाले | pleasing; agreeable |
2 नित नूतन सुख लखि अनुकूले। सकल बरातिन्ह मंदिर भूले।।
English explanation
Seeing fresh comforts suited to their liking each day, all the wedding guests forgot their own homes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | प्रतिदिन | daily |
| नूतन | नए-नए | ever new |
| सुख | सुख, आराम | pleasures; comforts |
| लखि | देखकर | seeing |
| अनुकूले | रुचि के अनुकूल | suited to their liking |
| सकल | सभी | all |
| बरातिन्ह | बरात में आए लोगों ने | the wedding-party members |
| मंदिर | अपने घर | their own homes |
| भूले | भूल गए | forgot |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.304
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 287
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 286, 287
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।