बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।।
मूल पाठ
अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।।
भयउ हृदयँ आनंद उछाहू। उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू।।
स्रोत अभिलेख 1.39 · पुस्तक पृ. 61, 63
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसे मानस-सरोवरको हृदयके नेत्रोंसे देखकर और उसमें गोता लगाकर कविकी बुद्धि निर्मल हो गयी, हृदयमें आनन्द और उत्साह भर गया और प्रेम तथा आनन्दका प्रवाह उमड़ आया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 62 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।।
English explanation
Beholding such a Manas lake with the mind’s eyes, the poet’s intellect became pure through immersion in it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| मानस | मानस सरोवर; रामकथा का रूपक-सरोवर | the Manas lake, a metaphor for Rama’s story |
| मानस | मन के | of the mind |
| चख | नेत्रों से | with the eyes |
| चाही | देखकर | having beheld |
| भइ | हो गई | became |
| कबि | कवि की | the poet’s |
| बुद्धि | बुद्धि | intellect |
| बिमल | निर्मल | pure |
| अवगाही | डुबकी लगाती हुई; स्नान करके | immersing itself; through bathing |
2 भयउ हृदयँ आनंद उछाहू। उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू।।
English explanation
Joy and enthusiasm arose in the heart; a stream of love and delight surged forth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हुआ; उत्पन्न हुआ | arose |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| आनंद | आनंद | joy |
| उछाहू | उत्साह | enthusiasm |
| उमगेउ | उमड़ पड़ा | surged forth |
| प्रेम | प्रेम | love |
| प्रमोद | हर्ष | delight |
| प्रबाहू | प्रवाह | stream |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 62
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 63
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।