बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।।
मूल पाठ
अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।।
चलत गगन भै गिरा सुहाई। जय महेस भलि भगति दृढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 1.57 · पुस्तक पृ. 77, 78
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्थिरबुद्धि शङ्करजी ऐसा विचारकर श्रीरघुनाथजीका स्मरण करते हुए अपने घर (कैलास) को चले। चलते समय सुन्दर आकाशवाणी हुई कि हे महेश! आपकी जय हो। आपने भक्तिकी अच्छी दृढ़ता की॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 77 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।।
English explanation
Having reflected thus, Shiva, steady in understanding, set out for his abode while remembering Rama, the hero of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| संकरु | शंकर अर्थात शिव | Shiva |
| मतिधीरा | धीर और स्थिर बुद्धि वाले | steady in understanding |
| चले | चल पड़े | set out |
| भवन | अपने निवास की ओर | toward his abode |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | while remembering |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम को | Rama, hero of Raghu’s lineage |
2 चलत गगन भै गिरा सुहाई। जय महेस भलि भगति दृढ़ाई।।
English explanation
As he went, a lovely voice sounded from the sky: ‘Glory to you, great Lord Shiva! You have firmly upheld devotion.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलत | चलते समय | as he went |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| भै | हुई / प्रकट हुई | arose |
| गिरा | वाणी | a voice |
| सुहाई | सुंदर, सुहावनी | lovely |
| जय | जय हो | glory to you |
| महेस | हे महेश अर्थात शिव | O great Lord Shiva |
| भलि | भली भाँति | well |
| भगति | भक्ति | devotion |
| दृढ़ाई | दृढ़ की | made firm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 77
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 77, 78
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।