बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।।
मूल पाठ
तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।।
एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं। सिव संकल्पु कीन्ह मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.57 · पुस्तक पृ. 77, 78
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब शिवजीने प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके चरणकमलोंमें सिर नवाया और श्रीरामजीका स्मरण करते ही उनके मनमें यह आया कि सतीके इस शरीरसे मेरी [पति-पत्नीरूपमें] भेंट नहीं हो सकती और शिवजीने अपने मनमें यह सङ्कल्प कर लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 77 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।।
English explanation
Then Shiva bowed his head at Lord Rama’s feet. While remembering Rama, this thought arose in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| संकर | शंकर अर्थात शिव ने | Shiva |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | his head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | while remembering |
| रामु | राम को | Rama |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| अस | ऐसा विचार | this thought |
| आवा | आया | arose |
2 एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं। सिव संकल्पु कीन्ह मन माहीं।।
English explanation
Shiva resolved in his mind: ‘While Sati remains in this body, I shall have no conjugal union with her.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहिं | इस | this |
| तन | शरीर में रहते | while in this body |
| सतिहि | सती से | with Sati, Shiva’s wife |
| भेट | दांपत्य मिलन | conjugal union |
| मोहि | मेरा / मुझे | for me |
| नाहीं | नहीं होगा | shall not occur |
| सिव | शिव ने | Shiva |
| संकल्पु | संकल्प | a resolve |
| कीन्ह | किया | made |
| मन | मन | his mind |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 77
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 77, 78
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।