बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बरु मागि चरन गहि रहेऊ। एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ।।
मूल पाठ
अस बरु मागि चरन गहि रहेऊ। एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ।।
अब तुम्ह मम अनुसासन मानी। बसहु जाइ सुरपति रजधानी।।
स्रोत अभिलेख 1.151 · पुस्तक पृ. 157, 158
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा वर माँगकर राजा भगवान्के चरण पकड़े रह गये। तब दयाके निधान भगवान्ने कहा—ऐसा ही हो। अब तुम मेरी आज्ञा मानकर देवराज इन्द्रकी राजधानी (अमरावती) में जाकर वास करो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 158 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस बरु मागि चरन गहि रहेऊ। एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ।।
English explanation
Having asked for this boon, Manu remained clasping the Lord’s feet. The Lord, treasury of compassion, said: So be it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| बरु | वरदान | boon |
| मागि | माँगकर | having requested |
| चरन | चरण | feet |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| रहेऊ | पकड़े रहे | remained holding |
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| करुनानिधि | करुणा के भंडार भगवान | the Lord, treasury of compassion |
| कहेऊ | कहा | said |
2 अब तुम्ह मम अनुसासन मानी। बसहु जाइ सुरपति रजधानी।।
English explanation
Now obey my command and go dwell in the capital of Indra, king of the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| तुम्ह | तुम | you |
| मम | मेरी | my |
| अनुसासन | आज्ञा | command |
| मानी | मानकर | obeying |
| बसहु | रहो | dwell |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सुरपति | देवताओं के राजा इंद्र की | of Indra, king of the gods |
| रजधानी | राजधानी | capital |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 158
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 157, 158
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।