बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुत बिषइक तव पद रति होऊ। मोहि बड़ मूढ़ कहै किन कोऊ।।
मूल पाठ
सुत बिषइक तव पद रति होऊ। मोहि बड़ मूढ़ कहै किन कोऊ।।
मनि बिनु फनि जिमि जल बिनु मीना। मम जीवन तिमि तुम्हहि अधीना।।
स्रोत अभिलेख 1.151 · पुस्तक पृ. 157, 158
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपके चरणोंमें मेरी वैसी ही प्रीति हो जैसी पुत्रके लिये पिताकी होती है, चाहे मुझे कोई बड़ा भारी मूर्ख ही क्यों न कहे। जैसे मणिके बिना साँप और जलके बिना मछली [नहीं रह सकती], वैसे ही मेरा जीवन आपके अधीन रहे (आपके बिना न रह सके)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 157 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुत बिषइक तव पद रति होऊ। मोहि बड़ मूढ़ कहै किन कोऊ।।
English explanation
May my love for your feet be like love for a son, even if someone calls me a great fool.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र | a son |
| बिषइक | के प्रति होने वाला | directed toward |
| तव | आपके | your |
| पद | चरणों में | for the feet |
| रति | प्रेम | love |
| होऊ | हो | may there be |
| मोहि | मुझे | me |
| बड़ | बड़ा | great |
| मूढ़ | मूर्ख | fool |
| कहै | कहे | may call |
| किन | भले ही | even if |
| कोऊ | कोई | anyone |
2 मनि बिनु फनि जिमि जल बिनु मीना। मम जीवन तिमि तुम्हहि अधीना।।
English explanation
Like a serpent without its jewel and a fish without water, my life depends entirely on you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनि | मणि | jewel |
| बिनु | बिना | without |
| फनि | सर्प | serpent |
| जिमि | जैसे | just as |
| जल | पानी | water |
| बिनु | बिना | without |
| मीना | मछली | fish |
| मम | मेरा | my |
| जीवन | जीवन | life |
| तिमि | वैसे ही | so too |
| तुम्हहि | आप ही पर | on you alone |
| अधीना | निर्भर | dependent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 157
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 157, 158
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।