बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु बिबेक अलोकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ।
मूल पाठ
मातु बिबेक अलोकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ।
बंदि चरन मनु कहेउ बहोरी। अवर एक बिनति प्रभु मोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.151 · पुस्तक पृ. 157, 158
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे माता! मेरी कृपासे तुम्हारा अलौकिक ज्ञान कभी नष्ट न होगा। तब मनुने भगवान्के चरणोंकी वन्दना करके फिर कहा—हे प्रभु! मेरी एक विनती और है—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 157 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मातु बिबेक अलोकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ।
English explanation
Mother, your extraordinary discernment will never fade, through my grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | हे माता | O mother |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| अलोकिक | अलौकिक | extraordinary |
| तोरें | तुम्हारा | your |
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| मिटिहि | मिटेगा | will fade |
| अनुग्रह | कृपा से | through grace |
| मोरें | मेरी | my |
2 बंदि चरन मनु कहेउ बहोरी। अवर एक बिनति प्रभु मोरी।।
English explanation
After paying homage at his feet, Manu said again: Lord, I have one more request.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | वंदना करके | having paid homage |
| चरन | चरणों की | at the feet |
| मनु | मनु, शतरूपा के पति | Manu, Shatarupa’s husband |
| कहेउ | कहा | said |
| बहोरी | फिर | again |
| अवर | और | another |
| एक | एक | one |
| बिनति | विनती | request |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| मोरी | मेरी | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 157
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 157, 158
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।