बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।।
अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी।।
स्रोत अभिलेख 1.75 · पुस्तक पृ. 91, 92
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे भवानी! धीर, मुनि और ज्ञानी बहुत हुए हैं, पर ऐसा (कठोर) तप किसीने नहीं किया। अब तू इस श्रेष्ठ ब्रह्माकी वाणीको सदा सत्य और निरन्तर पवित्र जानकर अपने हृदयमें धारण कर॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 91 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।।
English explanation
AI-generated draft: O Bhavani, no one has performed such austerities, though there have been many steadfast and wise sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसी | such |
| तपु | तपस्या | austerity |
| काहुँ | किसी ने | by anyone |
| न | नहीं | not |
| कीन्ह | की | performed |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
| भउ | हुए हैं | have existed |
| अनेक | अनेक | many |
| धीर | धैर्यवान | steadfast |
| मुनि | मुनि | sages |
| ग्यानी | ज्ञानवान | wise |
2 अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी।।
English explanation
Now take this excellent utterance of Brahma to heart, knowing it to be always true and ever pure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| उर | हृदय में | in your heart |
| धरहु | धारण करो | hold; take to heart |
| ब्रह्म | ब्रह्मा की | of Brahma, the creator |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बानी | वाणी | utterance |
| सत्य | सत्य | true |
| सदा | सदा | always |
| संतत | निरंतर | ever; continually |
| सुचि | पवित्र | pure |
| जानी | जानकर | knowing it to be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 91
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 91, 92
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।