बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।।
मूल पाठ
आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।।
मिलहिं तुम्हहि जब सप्त रिषीसा। जानेहु तब प्रमान बागीसा।।
स्रोत अभिलेख 1.75 · पुस्तक पृ. 91, 92
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब तेरे पिता बुलानेको आवें, तब हठ छोड़कर घर चली जाना और जब तुम्हें सप्तॢष मिलें तब इस वाणीको ठीक समझना॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 91 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।।
English explanation
When your father comes to call you, give up your insistence and go home then.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवै | आएँ | comes |
| पिता | तुम्हारे पिता | your father |
| बोलावन | बुलाने | to call you |
| जबहीं | जब ही | as soon as; when |
| हठ | हठ | insistence |
| परिहरि | छोड़कर | giving up |
| घर | घर | home |
| जाएहु | चली जाना | go |
| तबहीं | तभी | then |
2 मिलहिं तुम्हहि जब सप्त रिषीसा। जानेहु तब प्रमान बागीसा।।
English explanation
When the seven great sages meet you, then know the word of Brahma, lord of speech, to be confirmed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलहिं | मिलें | meet |
| तुम्हहि | तुमसे | you |
| जब | जब | when |
| सप्त | सात | seven |
| रिषीसा | श्रेष्ठ ऋषि | great sages |
| जानेहु | जानना | know; recognize |
| तब | तब | then |
| प्रमान | प्रमाणित, विश्वसनीय | confirmed; reliable |
| बागीसा | वाणी के स्वामी ब्रह्मा की बात | the word of Brahma, lord of speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 91
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 91, 92
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।