बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[मातासे] स्तुति भी नहीं की जाती। वह डर गयी कि मैंने जगत्पिता परमात्माको पुत्र करके जाना। श्रीहरिने माताको बहुत प्रकारसे समझाया [और कहा—] हे माता! सुनो, यह बात कहींपर कहना नहीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 201 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।।
हरि जननि बहुबिधि समुझाई। यह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।।
स्रोत अभिलेख 1.202 · पुस्तक पृ. 201, 202
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।।
English explanation
She could not offer praise and felt afraid: ‘I took the father of the world to be my own son.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| करि | की | be offered |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकी | could |
| भय | भय | fear |
| माना | अनुभव किया | felt |
| जगत | संसार के | of the world |
| पिता | पिता | father |
| मैं | मैंने | I |
| सुत | अपना पुत्र | my son |
| करि | के रूप में | as |
| जाना | समझा | regarded |
2 हरि जननि बहुबिधि समुझाई। यह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।।
English explanation
Hari reassured his mother in many ways: ‘Listen, Mother, do not tell this anywhere.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | हरि; यहाँ राम | Hari, here Rama |
| जननि | माता को | his mother |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| समुझाई | समझाया | explained to; reassured |
| यह | यह बात | this |
| जनि | मत | do not |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| कहसि | कहना | tell |
| सुनु | सुनो | listen |
| माई | हे माँ | Mother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.202
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 201
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 201, 202
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।