मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
बालकाण्ड 1.202
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।96 / 96 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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चौपाई
। ।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्तुति | praise | |
| की | be offered | |
| नहीं | not | |
| जा सकी | could | |
| भय | fear | |
| अनुभव किया | felt | |
| संसार के | of the world | |
| पिता | father | |
| मैंने | I | |
| अपना पुत्र | my son | |
| के रूप में | as | |
| समझा | regarded |
भावार्थ
वे स्तुति नहीं कर सकीं और भय अनुभव किया: ‘जगत के पिता को मैंने अपना पुत्र समझ लिया।’
She could not offer praise and felt afraid: ‘I took the father of the world to be my own son.’
। ।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि; यहाँ राम | Hari, here Rama | |
| माता को | his mother | |
| अनेक प्रकार से | in many ways | |
| समझाया | explained to; reassured | |
| यह बात | this | |
| मत | do not | |
| कहीं भी | anywhere | |
| कहना | tell | |
| सुनो | listen | |
| हे माँ | Mother |
भावार्थ
हरि ने माता को अनेक प्रकार से समझाया: ‘सुनो माँ, यह बात कहीं मत कहना।’
Hari reassured his mother in many ways: ‘Listen, Mother, do not tell this anywhere.’
दोहा/सोरठा
।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | time | |
| बार; फिर-फिर | after time; repeatedly | |
| राम की माता कौसल्या | Kaushalya, Rama’s mother | |
| विनती | humble plea | |
| करती हैं | makes | |
| हाथ | hands | |
| जोड़कर | having folded |
भावार्थ
कौसल्या हाथ जोड़कर बार-बार विनती करती हैं।
Kaushalya repeatedly makes a humble plea with folded hands.
।। 202।।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब; अब से | now; from now on | |
| न; ऐसा न हो | may not | |
| कभी भी | ever | |
| व्याप्त करे; अपने प्रभाव में ले | envelop; bring under its influence | |
| हे प्रभु | O Lord | |
| मुझे | me | |
| माया; मोह उत्पन्न करने वाली शक्ति | Maya, the power of illusion | |
| आपकी | your |
भावार्थ
‘हे प्रभु, अब आपकी माया मुझे कभी न घेरे।’
‘Lord, may your Maya never again envelop me.’