बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
असुर सेन सम नरक निकंदिनि। साधु बिबुध कुल हित गिरिनंदिनि।।
मूल पाठ
असुर सेन सम नरक निकंदिनि। साधु बिबुध कुल हित गिरिनंदिनि।।
संत समाज पयोधि रमा सी। बिस्व भार भर अचल छमा सी।।
स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 53, 54
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह रामकथा असुरोंकी सेनाके समान नरकोंका नाश करनेवाली और साधुरूप देवताओंके कुलका हित करनेवाली पार्वती (दुर्गा) है। यह संत-समाजरूपी क्षीरसमुद्रके लिये लक्ष्मीजीके समान है और सम्पूर्ण विश्वका भार उठानेमें अचल पृथ्वीके समान है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 53 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1असुर सेन सम नरक निकंदिनि। साधु बिबुध कुल हित गिरिनंदिनि।।
English explanation
The story destroys hells likened to an army of demons, and is like Parvati, the mountain's daughter, in benefiting the communities of saints and gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असुर | असुरों की | of demons |
| सेन | सेना | army |
| सम | के समान | likened to |
| नरक | नरकों को | hells |
| निकंदिनि | जड़ से नष्ट करने वाली | utterly destroying |
| साधु | साधुओं | saints |
| बिबुध | देवताओं | gods |
| कुल | के समुदाय | communities |
| हित | के कल्याण के लिए | for the welfare of |
| गिरिनंदिनि | पर्वतपुत्री पार्वती | Parvati, daughter of the mountain |
2संत समाज पयोधि रमा सी। बिस्व भार भर अचल छमा सी।।
English explanation
The story is like Lakshmi to the ocean of the saints' fellowship, and like the steadfast earth in bearing the world's burden.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतों का | of saints |
| समाज | समाज | fellowship |
| पयोधि | समुद्र | ocean |
| रमा | देवी लक्ष्मी | the goddess Lakshmi |
| सी | जैसी | like |
| बिस्व | विश्व का | of the world |
| भार | भार | burden |
| भर | वहन करने में | in bearing |
| अचल | अडिग | steadfast |
| छमा | पृथ्वी | earth |
| सी | जैसी | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 53
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 53, 54
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।