बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयमदूतोंके मुखपर कालिख लगानेके लिये यह जगत्में यमुनाजीके समान है और जीवोंको मुक्ति देनेके लिये मानो काशी ही है। यह श्रीरामजीको पवित्र तुलसीके समान प्रिय है और तुलसीदासके लिये हुलसी (तुलसीदासजीकी माता) के समान हृदयसे हित करनेवाली है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 53 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी।।
रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी। तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी।।
स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 53, 54
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी।।
English explanation
In the world, the story is like the Yamuna, blackening the faces of Yama's attendants; for liberation while alive, it is as though it were Kashi.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जम | मृत्यु के देवता यम के | of Yama, god of death |
| गन | दूतों के | attendants |
| मुहँ | मुख पर | on the faces |
| मसि | कालिख | soot; disgrace |
| जग | जगत में | in the world |
| जमुना | यमुना नदी | the Yamuna River |
| सी | जैसी | like |
| जीवन | जीवित अवस्था में | while alive |
| मुकुति | मुक्ति | liberation |
| हेतु | के लिए | for |
| जनु | मानो | as though |
| कासी | काशी, पवित्र नगरी | Kashi, the sacred city |
2 रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी। तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी।।
English explanation
The story is like sacred basil, dear to Rama, and like Tulsidas's mother Hulsi in its heartfelt care for him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | to Rama |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| पावनि | पवित्र करने वाली | purifying |
| तुलसी | तुलसी का पौधा | sacred basil |
| सी | जैसी | like |
| तुलसिदास | कवि तुलसीदास के | for the poet Tulsidas |
| हित | हित में | in caring for |
| हियँ | हृदय से | at heart |
| हुलसी | हुलसी, तुलसीदास की माता | Hulsi, Tulsidas's mother |
| सी | जैसी | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 53
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 53, 54
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।