बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिवप्रय मेकल सैल सुता सी। सकल सिद्धि सुख संपति रासी।।
मूल पाठ
सिवप्रय मेकल सैल सुता सी। सकल सिद्धि सुख संपति रासी।।
सदगुन सुरगन अंब अदिति सी। रघुबर भगति प्रेम परमिति सी।।
स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 53, 54
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह रामकथा शिवजीको नर्मदाजीके समान प्यारी है, यह सब सिद्धियोंकी तथा सुख-सम्पत्तिकी राशि है। सद्गुणरूपी देवताओंके उत्पन्न और पालन-पोषण करनेके लिये माता अदितिके समान है। श्रीरघुनाथजीकी भक्ति और प्रेमकी परम सीमा-सी है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 54 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सिवप्रय मेकल सैल सुता सी। सकल सिद्धि सुख संपति रासी।।
English explanation
The story is like the Narmada, daughter of Mount Mekala and dear to Shiva, and is a treasury of all accomplishments, happiness, and wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिवप्रय | शिव को प्रिय | dear to Shiva |
| मेकल | मेकल नामक | named Mekala |
| सैल | पर्वत की | of the mountain |
| सुता | पुत्री नर्मदा | daughter, the Narmada River |
| सी | जैसी | like |
| सकल | सभी | all |
| सिद्धि | सिद्धियाँ | accomplishments; spiritual attainments |
| सुख | सुख | happiness |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| रासी | का भंडार | a treasury of |
2 सदगुन सुरगन अंब अदिति सी। रघुबर भगति प्रेम परमिति सी।।
English explanation
The story is like Aditi, mother of the gods figured as virtues, and like the utmost measure of devotion and love for Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदगुन | सद्गुणरूपी | virtues figured as |
| सुरगन | देवसमूह की | the host of gods |
| अंब | माता | mother |
| अदिति | अदिति, देवताओं की माता | Aditi, mother of the gods |
| सी | जैसी | like |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम की | for Rama, foremost of Raghu's line |
| भगति | भक्ति | devotion |
| प्रेम | प्रेम | love |
| परमिति | परम सीमा | utmost measure |
| सी | जैसी | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 54
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 53, 54
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।