बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई।।
मूल पाठ
रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई।।
सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि।।
स्रोत अभिलेख 1.31 · पुस्तक पृ. 53, 54
भावार्थ
मूल पाठ के बादरामकथा कलियुगमें सब मनोरथोंको पूर्ण करनेवाली कामधेनु गौ है और सज्जनोंके लिये सुन्दर सञ्जीवनी जड़ी है। पृथ्वीपर यही अमृतकी नदी है, जन्म-मरणरूपी भयका नाश करनेवाली और भ्रमरूपी मेढकोंको खानेके लिये सॢपणी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 53 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई।।
English explanation
In the age of Kali, the story of Rama is a wish-fulfilling cow and a lovely life-restoring root for the virtuous.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामकथा | राम की कथा | the story of Rama |
| कलि | कलियुग में | in the age of Kali |
| कामद | इच्छाएँ पूरी करने वाली | wish-fulfilling |
| गाई | गाय | cow |
| सुजन | सज्जनों के लिए | for the virtuous |
| सजीवनि | जीवन लौटाने वाली संजीवनी | life-restoring herb |
| मूरि | जड़ | root |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
2सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि।।
English explanation
That story is a river of nectar on earth; it destroys fear and is a female serpent to the frog of confusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही रामकथा | that same story |
| बसुधातल | पृथ्वी पर | on earth |
| सुधा | अमृत की | of nectar |
| तरंगिनि | नदी | river |
| भय | भय | fear |
| भंजनि | नष्ट करने वाली | destroying |
| भ्रम | भ्रमरूपी | confusion figured as |
| भेक | मेंढक | frog |
| भुअंगिनि | सर्पिणी | female serpent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 53
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 53, 54
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