बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।।
मूल पाठ
अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।।
बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।
स्रोत अभिलेख 1.325 · पुस्तक पृ. 307, 308
भावार्थ
मूल पाठ के बादमानो कमलको लाल परागसे अच्छी तरह भरकर अमृतके लोभसे साँप चन्द्रमाको भूषित कर रहा है। [यहाँ श्रीरामके हाथको कमलकी, सेंदुरको परागकी, श्रीरामकी श्याम भुजाको साँपकी और सीताजीके मुखको चन्द्रमाकी उपमा दी गयी है] फिर वसिष्ठजीने आज्ञा दी, तब दूलह और दुलहिन एक आसनपर बैठे॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 308 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।।
English explanation
As though a serpent, yearning for nectar, were adorning the moon with a lotus well filled with red pollen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अरुन | लाल | red |
| पराग | पराग से | with pollen |
| जलजु | कमल | a lotus |
| भरि | भरकर | having filled |
| नीकें | भलीभाँति | thoroughly |
| ससिहि | चंद्रमा को | the moon |
| भूष | सजाता है | adorns |
| अहि | सर्प | a serpent |
| लोभ | लालसा; लोभ में | in longing |
| अमी | अमृत | nectar of immortality |
| कें | के | for |
2 बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।
English explanation
Then Vasistha gave instructions, and the bride and groom sat together on one seat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| बसिष्ठ | ऋषि वसिष्ठ ने | the sage Vasistha |
| दीन्ह | दिया | gave |
| अनुसासन | निर्देश | instructions |
| बरु | वर राम | the groom, Rama |
| दुलहिनि | वधू सीता | the bride, Sita |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| एक | एक ही | one shared |
| आसन | आसन पर | seat |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.325
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 308
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 307, 308
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